ऋणदाता आपकी आय, मौजूदा EMI, क्रेडिट स्कोर और प्रॉपर्टी को देखते हैं। RBI तय करता है कि मूल्य का कितना हिस्सा फ़ाइनेंस हो सकता है, इसलिए लोन की राशि के हिसाब से लगभग 10% से 25% डाउन पेमेंट और कीमत के ऊपर के खर्चों का इंतज़ाम करना होगा।
ऋणदाता क्या जाँचते हैं
ज़्यादातर बैंक और हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनियाँ उम्र, स्थिर आय, मौजूदा लोन, क्रेडिट स्कोर (आमतौर पर 750 और उससे ऊपर पसंद किया जाता है) और प्रॉपर्टी की कानूनी व तकनीकी स्थिति देखती हैं।
लोन की राशि और डाउन पेमेंट
लेखन के समय RBI के लोन-टू-वैल्यू नियमों के अनुसार ₹30 लाख तक के लोन पर 90% तक, ₹30 लाख से ₹75 लाख तक पर 80% तक और ₹75 लाख से ऊपर पर 75% तक फ़ाइनेंस मिल सकता है। स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और अन्य खर्च आमतौर पर फ़ाइनेंस नहीं होते, इसलिए इनके लिए नकद अलग रखें।
EMI कैसे तय होती है
EMI लोन की राशि, ब्याज दर और अवधि पर निर्भर करती है। सिर्फ़ उदाहरण के लिए, ₹50 लाख का लोन 8.5% सालाना पर 20 साल के लिए लें तो EMI लगभग ₹43,400 बनती है। दरें बदलती रहती हैं, इसलिए हर ऋणदाता से मौजूदा दर और प्रोसेसिंग फ़ीस पूछें।
लंबी अवधि से EMI घटती है, पर कुल चुकाया गया ब्याज बढ़ता है। कई उधारकर्ता लंबी अवधि चुनकर मौका मिलने पर पहले चुका देते हैं।
इन गलतियों से बचें
EMI को इतना न खींचें कि कोई अप्रत्याशित खर्च संकट बन जाए। बीमा, मेंटेनेंस और शिफ्टिंग के खर्च न भूलें। कम से कम तीन ऋणदाताओं की तुलना करें, और व्यक्तियों के फ़्लोटिंग-रेट लोन पर ऋणदाता पहले चुकाने पर जुर्माना नहीं लगा सकते।
लोग क्या पूछते हैं
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